ब्लैक होल क्या है

कृष्ण विवर या ब्लैक होल इतने गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र वाली कोई ऐसी खगोलीय वस्तु है (खगोलीय वस्तु ऐसी वास्तु को कहा जाता है जो ब्रह्माण्ड में प्राक्रतिक रूप से पाई जाती है जैसे-तारे,ग्रह, उल्का पिंड,पल्सर आदि।) हमारे व्रह्माण्ड मैं कई तरह के ब्लैक होल है पर साइन्टिस्ट (scientist) ने अभी तक सिर्फ तीन तरह के ब्लैक होल खोज निकले है
1.stellar mass black hole (स्टेलर मास्स ब्लैक होल)
ऐसा तारा जिसका द्रव्यमान हमारे सूर्ये से कुछ गुना अधिक होता है और गुरुत्वीय संकुचन के कारण वह अतः ब्लैक होल बन जाता है उसे स्टेलर मास्स ब्लैक होल (stellar mass black hole) कहते है।
2.suppermassive black hole(सुपरमस्सीवे ब्लैक होल)
ऐसे ब्लैक होल जिसका निमार्ण आकाश गंगा गैलेक्सी (galexy) के केन्द्र मैं होता है और जिसका गंतव्य बहुत ही ऊपर होता है और विशाल भी होते है उसे सुपरमस्सीवे ब्लैक होल(supermassive black hole) कहते है।
3.primordial black hole (पृमोरडीएल ब्लैक hole)
कुछ ऐसे भी ब्लैक होल होते है जिसका द्रव्यमान हमारे सूर्ये से कम होता है और जिनका निर्माण गुरुत्वीय संकुचन के कारण नही वल्कि अपने केन्द्रता
पदार्थ और ताप के संपीडित होने के कारण हुआ है उसे पृमोरडीएल ब्लैक होल (primordial black hole) कहते है।
जिसके खिंचाब से प्रकास सहित कुछ भी नही बच सकता। कालेछिद्र के चारों ओर घटना क्षितिज नामक एक सीमा होती है जिससे वस्तुए गिर तो सकती है पर बाहर नही आ सकती। काला इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश को अवशोषित कर लेता और कुछ भी परवर्तित नही करता। मसलन ब्लैक होल का पता तारो की किसी समूह की गति से लगाया जा सकता है जो अन्तरिक्ष के खाली दिखाई देने वाले एक हिस्से की परिक्रमा कर रहे हो। एक साथी तारे दुारा आप अपेक्षाकृत छोटे ब्लैक होल मैं गैस गिरते हुए देख सकते हो। यह गैस सर्पिल आकर मैं अंदर की तरफ आती है,बहुत उचच तापमान तक गर्म हो कर बड़ी मात्रा मे विकिरण छोड़ता है।
जिसका पता पृथ्वी पर सथित या पृथ्वी की कक्षा मैं घूमती दूरबीनो से लगाया जा सकता है। सैद्धान्तिक रूप से, किसी भी मात्रा का पदार्थ(matter) एक ब्लैक होल बन सकता है
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